NGO help social organization के कार्य क्षेत्र में टीम का ज्यादा समय २००० से ज्यादा लोगों को कैंप lets respect women (इस कार्यक्रम के द्वारा हम आत्म रक्षा के कारगर तरीके महिलाओं को सिखाते हैं ) को पूरा करने में लगा ,बोहत दर्द है सिने में उस इज्जत के जिसे कल किसी कि माँ आज किसी कि बेटी और बहन, पत्नी, प्रेरणा का नाम हम देते हैं ,कबी अपनों ने ये दर्द दिए हैं तो कभी अजनवियों ने, कबी किसी रिश्ते में छल मिला तो कबी किसी नाते ने छल दिया,हम उनका वो दुख तो नही मिटा सकते मरग आने वाले वक्त के लिए सुरक्षा का सूत्र बांटते गए.. जिसका नतीजा हम सब की भीगी ऑंखें थीं,इसके साथ ही हम दर्द के उस पढ़ाव से भी मिले कि जहाँ हम सब की आखरी घड़ियाँ सांसों की उमीद में चल रही होती हैं --- जीवन के इस पढ़ाव में कितनी तकलीफ है maano जैसे उनकी थकी ऑंखें कह रहीं हो कि..कोई हमसे नहीं मिलता,
किसी से हम नही मिलते,
इसी कशमाकश में जीवन गुजारा है के बदन अपना टूटते देख,ख्याल दुसरे के दर्द पे जाता है न जाने क्यूँ कोई हमसे मिलने नही आता है.....न जाने क्यूँ कोई हमसे मिलने नही आता है.....
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Sunday, May 23, 2010
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